Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar -7-3-26

सोरठि महला ५ ॥
गुरि पूरै चरनी लाइआ ॥ हरि संगि सहाई पाइआ ॥ जह जाईऐ तहा सुहेले ॥ करि किरपा प्रभि मेले ॥१॥ हरि गुण गावहु सदा सुभाई ॥ मन चिंदे सगले फल पावहु जीअ कै संगि सहाई ॥१॥ रहाउ ॥ नाराइण प्राण अधारा ॥ हम संत जनां रेनारा ॥ पतित पुनीत करि लीने ॥ करि किरपा हरि जसु दीने ॥२॥ पारब्रहमु करे प्रतिपाला ॥ सद जीअ संगि रखवाला ॥ हरि दिनु रैनि कीरतनु गाईऐ ॥ बहुड़ि न जोनी पाईऐ ॥३॥ जिसु देवै पुरखु बिधाता ॥ हरि रसु तिन ही जाता ॥ जमकंकरु नेड़ि न आइआ ॥ सुखु नानक सरणी पाइआ ॥४॥९॥५९॥ {पन्ना 623}

अर्थ: हे भाई! सदा प्यार से परमात्मा के सिफत सालाह के गीत गाते रहा करो। (सिफत सालाह की बरकति से) मन मांगे फल (प्रभू के दर से) प्राप्त करते रहोगे, परमात्मा जीवन के साथ (बसता) साथी (प्रतीत होता रहेगा)।1। रहाउ।

(हे भाई जिस मनुष्य को) पूरे गुरू ने (परमात्मा के) चरणों में जोड़ दिया, उसने वह परमात्मा पा लिया जो हर वक्त अंग-संग बसता है, और (जीवन का) मददगार है। (अगर प्रभू चरणों में जुड़े रहें तो) जहाँ भी जाएं, वहीं सुखी रह सकते हैं (पर जिन्हें चरणों में मिलाया है) प्रभू ने (खुद ही) कृपा करके मिलाया है।1।

हे भाई! मैं तो संत जनों की धूड़ बना रहता हूँ, (संत जनों की कृपा से) परमात्मा जीवन का आसरा (प्रतीत होता रहता है)। संत जन कृपा करके परमात्मा की सिफत सालाह की दाति देते हैं, (और इस तरह) विकारों में गिरे हुओं को (भी) पवित्र जीवन वाला बना लेते हैं।2।

हे भाई! दिन-रात (हर समय) परमात्मा की सिफत सालाह के गीत गाते रहना चाहिए, (सिफत सालाह की बरकति से) दुबारा जनम-मरन का चक्कर नहीं पड़ता। परमात्मा खुद (सिफत सालाह करने वालों की) रक्षा करता है, सदा उनके प्राणों के साथ रक्षक बना रहता है।3।

(पर) हे नानक! उस मनुष्य ने ही परमात्मा के नाम का स्वाद समझा है (कद्र जानी है), जिसे सृजनहार सर्व-व्यापक प्रभू खुद (ये दाति) देता है। परमात्मा की शरण पड़ा रह के वह आत्मिक आनंद लेता रहता है। जम दूत भी उसके नजदीक नहीं फटकते।4।9।49।

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