Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar -1-3-26

सूही महला ४ ॥
हरि नामा हरि रंङु है हरि रंङु मजीठै रंङु ॥ गुरि तुठै हरि रंगु चाड़िआ फिरि बहुड़ि न होवी भंङु ॥१॥ मेरे मन हरि राम नामि करि रंङु ॥ गुरि तुठै हरि उपदेसिआ हरि भेटिआ राउ निसंङु ॥१॥ रहाउ ॥ मुंध इआणी मनमुखी फिरि आवण जाणा अंङु ॥ हरि प्रभु चिति न आइओ मनि दूजा भाउ सहलंङु ॥२॥ हम मैलु भरे दुहचारीआ हरि राखहु अंगी अंङु ॥ गुरि अम्रित सरि नवलाइआ सभि लाथे किलविख पंङु ॥३॥ हरि दीना दीन दइआल प्रभु सतसंगति मेलहु संङु ॥ मिलि संगति हरि रंगु पाइआ जन नानक मनि तनि रंङु ॥४॥३॥ {पन्ना 731-732}

अर्थ: हे मेरे मन! परमात्मा के नाम में प्यार जोड़। अगर (किसी मनुष्य पर) गुरू मेहरवान हो के उसको हरी-नाम का उपदेश दे, तो उस मनुष्य को प्रभू-पातशाह जरूर मिल जाता है।1। रहाउ।

हे भाई! हरी-नाम का सिमरन (मनुष्य के मन में) हरी का प्यार पैदा करता है, और, ये हरी के साथ प्यार मजीठ के रंग जैसा प्यार होता है। अगर (किसी मनुष्य पर) गुरू प्रसन्न हो के उसको हरी-ना का रंग चढ़ा दे तो दोबारा उस रंग (प्यार) का कभी नाश नहीं होता।1।

हे भाई! जो अंजान जीव-स्त्री (गुरू का आसरा छोड़ के) अपने ही मन के पीछे चलती है, उसके जनम-मरण के चक्करों का आसरा बना रहता है। उस (जीव-स्त्री) के स्मर्ण में हरी प्रभू नहीं बसता, उसके मन में माया का मोह ही साथी रहता है।2।

हे हरी! हम जीव! (विकारों की) मैल से भरे रहते हैं, हम दुराचारी हैं। हे अंग पालने वाले प्रभू! हमारी रक्षा कर, हमारी सहायता कर। हे भाई! गुरू ने (जिस मनुष्य को) आत्मिक जीवन देने वाले नाम-जल सरोवर में स्नान करा दिया, (उसके अंदर से) सारे पाप उतर जाते है, पापों के कीचड़ धुल जाता है।3।

हे अति कंगालों पर दया करने वाले हरी-प्रभू! मुझे साध-संगति के साथ मिला। हे दास नानक! (कह–) जिस मनुष्य ने साध-संगति में मिल के परमात्मा के नाम का प्रेम प्राप्त कर लिया, उसके मन में उसके हृदय में वह प्रेम (सदा टिका रहता है)।4।3।

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