Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar -23-2-26

बिलावलु महला ५ ॥
अपणे बालक आपि रखिअनु पारब्रहम गुरदेव ॥ सुख सांति सहज आनद भए पूरन भई सेव ॥१॥ रहाउ ॥ भगत जना की बेनती सुणी प्रभि आपि ॥ रोग मिटाइ जीवालिअनु जा का वड परतापु ॥१॥ दोख हमारे बखसिअनु अपणी कल धारी ॥ मन बांछत फल दितिअनु नानक बलिहारी ॥२॥१६॥८०॥ {पन्ना 819-820}

अर्थ: हे भाई! परमात्मा सबसे बड़ा देवता (है, हम जीव उसके बच्चे हैं) अपने बच्चों की वह सदा ही स्वयं रक्षा करता आया है। (जो मनुष्य उसकी शरण पड़ते हैं, उनके अंदर) शांति, आत्मिक अडोलता के सुख-आनंद पैदा होते हैं, उनकी सेवा-सिमरन की मेहनत सफल हो जाती है।1। रहाउ।

हे भाई! जिस प्रभू का (सबसे) बड़ा तेज-प्रताप है उस ने अपने भक्तों की आरजू (सदा) सुनी है (उनके अंदर से) रोग मिटा के उनको आत्मिक जीवन की दाति बख्शी है।1।

हे भाई! उस प्रभू-पिता ने हम बच्चों के ऐब सदा माफ कर दिए हैं, और हमारे अंदर अपने नाम की ताकत भरी है। हे नानक! प्रभू पिता ने हम बच्चों को सदा मन-मांगे फल दिए हैं, उस प्रभू से सदा सदके जाना चाहिए।2।16।80।

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