Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar -18-2-26

वडहंसु महला ३ ॥
गुरमुखि सचु संजमु ततु गिआनु ॥ गुरमुखि साचे लगै धिआनु ॥१॥ गुरमुखि मन मेरे नामु समालि ॥ सदा निबहै चलै तेरै नालि ॥ रहाउ ॥ गुरमुखि जाति पति सचु सोइ ॥ गुरमुखि अंतरि सखाई प्रभु होइ ॥२॥ गुरमुखि जिस नो आपि करे सो होइ ॥ गुरमुखि आपि वडाई देवै सोइ ॥३॥ गुरमुखि सबदु सचु करणी सारु ॥ गुरमुखि नानक परवारै साधारु ॥४॥६॥ {पन्ना 559-560}

अर्थ: हे मन! गुरू की शरण पड़ कर परमात्मा का नाम सदा याद करता रह। ये नाम ही तेरे साथ जाने वाला है साथ निभाने वाला है। रहाउ।

हे भाई! गुरू की शरण पड़ के सदा स्थिर प्रभू का नाम-सिमरन ही इन्द्रियों का सही यत्न है, और आत्मिक जीवन की सूझ का मूल है। गुरू की शरण पड़ने से सदा कायम रहने वाले परमात्मा में सुरति जुड़ी रहती है।1।

हे भाई! गुरू की शरण पड़ कर वह सदा स्थिर हरी का नाम-सिमरन ऊँची जाति व ऊँची कुल (का मूल) है। गुरू के सन्मुख रहने वाले मनुष्य के अंदर परमात्मा आ बसता है, और उसका (सदा का) साथी बन जाता है।2।

पर वही मनुष्य गुरू के सन्मुख हो सकता है जिसको परमात्मा स्वयं (इस लायक) बनाता है, वह परमात्मा खुद मनुष्य को गुरू के सन्मुख करके सम्मान बख्शता है।3।

हे भाई! गुरू की शरण पड़ कर सदा स्थिर प्रभू की सिफत सालाह की बाणी (हृदय में) संभाल, यही करने योग्य काम है। हे नानक! गुरू के सन्मुख रहने वाला मनुष्य अपने परिवार के वास्ते भी आसरा देने के काबिल हो जाता है।4।6।

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