Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar – 23-12-25

टोडी महला ५ घरु ५ दुपदे ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ऐसो गुनु मेरो प्रभ जी कीन ॥ पंच दोख अरु अहं रोग इह तन ते सगल दूरि कीन ॥ रहाउ ॥ बंधन तोरि छोरि बिखिआ ते गुर को सबदु मेरै हीअरै दीन ॥ रूपु अनरूपु मोरो कछु न बीचारिओ प्रेम गहिओ मोहि हरि रंग भीन ॥१॥ पेखिओ लालनु पाट बीच खोए अनद चिता हरखे पतीन ॥ तिस ही को ग्रिहु सोई प्रभु नानक सो ठाकुरु तिस ही को धीन ॥२॥१॥२०॥ {पन्ना 716}

तिस ही: ‘तिसु’ की ‘ु’ मात्रा संबंधक ‘ही’ के कारण हटा दी गई है।

अर्थ: हे भाई! मेरे प्रभू जी ने (मेरे पर) ऐसा उपकार कर दिया है, (कि) कामादिक पाँचों विकार और अहंकार का रोग- ये सारे उसने मेरे शरीर में से बाहर निकाल दिए हैं। रहाउ।

(हे भाई! मेरे प्रभू जी ने मेरी माया की) फाहियां तोड़ के (मुझे) माया (के मोह) से छुड़ा के गुरू का शबद मेरे हृदय में बसा दिया है। मेरा कोई सुहज कोई कुहज (कोई अच्छाई कोई बुराई), वह कुछ भी अपने मन में नहीं लाया। मुझे उसने अपने प्रेम से बाँध दिया है। अपने प्यार रंग में भिगो दिया है।1।

हे नानक! (कह– हे भाई!) अब जबकि बीच के पर्दे दूर करके मैंने सुंदर लाल को देखा है, तो मेरे चिक्त में आनंद पैदा हो गया है, मेरा मन खुशी से गद-गद हो उठा है। (अब मेरा ये शरीर) उसी का ही घर (बन गया है) वही (इस घर का) मालिक (बन गया है), उसी का ही मैं सेवक बन गया हूँ।2।1।20।

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