Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar – 6-6-26

गोंड महला ५ ॥
जा कै संगि इहु मनु निरमलु ॥ जा कै संगि हरि हरि सिमरनु ॥ जा कै संगि किलबिख होहि नास ॥ जा कै संगि रिदै परगास ॥१॥ से संतन हरि के मेरे मीत ॥ केवल नामु गाईऐ जा कै नीत ॥१॥ रहाउ ॥ जा कै मंत्रि हरि हरि मनि वसै ॥ जा कै उपदेसि भरमु भउ नसै ॥ जा कै कीरति निरमल सार ॥ जा की रेनु बांछै संसार ॥२॥ कोटि पतित जा कै संगि उधार ॥ एकु निरंकारु जा कै नाम अधार ॥ सरब जीआं का जानै भेउ ॥ क्रिपा निधान निरंजन देउ ॥३॥ पारब्रहम जब भए क्रिपाल ॥ तब भेटे गुर साध दइआल ॥ दिनु रैणि नानकु नामु धिआए ॥ सूख सहज आनंद हरि नाए ॥४॥४॥६॥ {पन्ना 863}

अर्थ: हे भाई! मेरे मित्र तो प्रभू के वह संतजन हैं, जिनकी संगति में सदा सिर्फ हरी का नाम ही गाया जाता है।1। रहाउ।

(हे भाई! मेरे मित्र तो वह संतजन हैं) जिनकी संगति में रहने से ये मन पवित्र हो जाता है, जिनकी संगति में सदा हरी-नाम का सिमरन (करने का मौका मिलता) है, जिनकी संगति में रहने से सारे पाप नाश हो जाते हैं, और जिनकी संगति में टिकने से हृदय में (स्वच्छ आत्मिक जीवन का) प्रकाश हो जाता है।1।

(हे भाई! मेरे मित्र तो वह संत जन हैं) जिनके उपदेश की बरकति से परमात्मा का नाम मन में आ बसता है, जिन के उपदेश से (मन में से) हरेक डर, हरेक भरम-वहम दूर हो जाता है, जिनके हृदय में श्रेष्ठ और पवित्र करने वाली हरी-कीर्ति बसती रहती है, और जिनके चरण-धूड़ की अभिलाषा सारा जगत करता रहता है।2।

(हे भाई! मेरे मित्र तो वह संत जन हैं) जिनकी संगति में रह के करोड़ों विकारियों का (विकारों से) निस्तारा हो जाता है, जिनके हृदय में (हर वक्त) केवल परमात्मा ही बसता है, जिनके अंदर उस परमेश्वर के नाम का आसरा बना रहता है जो सारे जीवों (के दिल) का भेद जानता है, जो कृपा का खजाना है, जो माया के प्रभाव से परे हैं और जो प्रकाश-रूप है।3।

(हे भाई!) जब प्रभू जी दयावान होते हैं, तब ऐसे दयालु संतजन मिलते हैं तब सतिगुरू जी मिलते हैं। (हे भाई! ऐसे संत जनों की संगति में) नानक दिन-रात परमात्मा का नाम सिमरता है, और हरी-नाम की बरकति से (नानक के हृदय में) आत्मिक अडोलता के सुख-आनंद बने रहते हैं।4।4।6।

About the Author

You may also like these