ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ रागु सूही छंत महला १ घरु ४ ॥
जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥ दानि तेरै घटि चानणा तनि चंदु दीपाइआ ॥ चंदो दीपाइआ दानि हरि कै दुखु अंधेरा उठि गइआ ॥ गुण जंञ लाड़े नालि सोहै परखि मोहणीऐ लइआ ॥ वीवाहु होआ सोभ सेती पंच सबदी आइआ ॥ जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥१॥ हउ बलिहारी साजना मीता अवरीता ॥ इहु तनु जिन सिउ गाडिआ मनु लीअड़ा दीता ॥ लीआ त दीआ मानु जिन्ह सिउ से सजन किउ वीसरहि ॥ जिन्ह दिसि आइआ होहि रलीआ जीअ सेती गहि रहहि ॥ सगल गुण अवगणु न कोई होहि नीता नीता ॥ हउ बलिहारी साजना मीता अवरीता ॥२॥ गुणा का होवै वासुला कढि वासु लईजै ॥ जे गुण होवन्हि साजना मिलि साझ करीजै ॥ साझ करीजै गुणह केरी छोडि अवगण चलीऐ ॥ पहिरे पट्मबर करि अड्मबर आपणा पिड़ु मलीऐ ॥ जिथै जाइ बहीऐ भला कहीऐ झोलि अम्रितु पीजै ॥ गुणा का होवै वासुला कढि वासु लईजै ॥३॥ आपि करे किसु आखीऐ होरु करे न कोई ॥ आखण ता कउ जाईऐ जे भूलड़ा होई ॥ जे होइ भूला जाइ कहीऐ आपि करता किउ भुलै ॥ सुणे देखे बाझु कहिऐ दानु अणमंगिआ दिवै ॥ दानु देइ दाता जगि बिधाता नानका सचु सोई ॥ आपि करे किसु आखीऐ होरु करे न कोई ॥४॥१॥४॥ {पन्ना 765-766}
(नोट: जगत में जीव, मानो, पहलवान है। कामादिक विकारों से इसकी कुष्ती हो रही है। जो हार जाता है वह मैदान छोड़ के भाग जाता है)।
अर्थ: जिस प्रभू ने ये जगत पैदा किया है उसी ने ही इसकी संभाल की हुई है, उसी ने ही इसको माया की दौड़-भाग में लगाया हुआ है।
(पर, हे प्रभू!) तेरी बख्शिश से (किसी सौभाग्य भरे) हृदय में तेरी ज्योति का प्रकाश होता है, (किसी सौभाग्यशाली) शरीर में चाँद चमकता है (तेरे नाम की शीतलता हिल्लौरे देती है)।
प्रभू की बख्शिश से जिस हृदय में (प्रभू नाम की) शीतलता चमक मारती है उस हृदय में से (अज्ञानता का) अंधकार और दुख-कलेश दूर हो जाता है। जैसे बारात दूल्हे के साथ ही फबती है, वैसे ही जीव-स्त्री के गुण (भी) तभी अच्छे लगते हैं जब प्रभू-पति हृदय में बसता हो। जिस जीव-स्त्री ने अपने जीवन को प्रभू की सिफत सालाह से सुंदर बना लिया है, उस ने इसकी कद्र समझ के प्रभू को अपने हृदय में बसा लिया है। उसका प्रभू-पति से मिलाप हो जाता है, (लोक-परलोक में) उसे शोभा भी मिलती है, एक-रस आत्मिक आनंद का दाता प्रभू उसके हृदय में प्रकट हो जाता है।
जिस प्रभू ने ये जगत पैदा किया है वही इसकी संभाल करता है, उसने इसको माया की दौड़-भाग में लगाया हुआ है।1।
मैं उन सज्जनों-मित्रों से सदके जाता हॅूँ जिन पर माया का पर्दा नहीं पड़ा जिनकी संगति करके मैंने उनके साथ दिली सांझ डाली है। जिन गुरमुखों के साथ दिली सांझ पड़ सके वे सज्जन कभी भी भूलने नहीं चाहिए। उनका दर्शन करने से आत्मिक खुशियाँ पैदा होती हैं, वह सज्जन (अपने सत्संगियों को अपनी) जान की तरह रखते हैं (जिंद से भी ज्यादा प्यारा समझते हैं)। उनमें सारे ही गुण होते हें, अवगुण उनके नजदीक नहीं फटकते।
मैं सदके हूँ उन सज्जन-मित्रों के जिन पर माया अपना असर ना कर सकी।2।
(अगर किसी मनुष्य के पास सुगंधि देने वाली वस्तुओं से भरा डिब्बा हो, उस डब्बे का लाभ उसे तब ही है जब वह उस डब्बे को खोल के उससे सुगंधि ले। गुरमुखों की संगति गुणों का डब्बा है) यदि किसी को गुणों का डब्बा मिल जाए, तो वह डब्बा खोल के (डब्बे के भीतर की) सुगंधि लेनी चाहिए। (हे भाई!) अगर तू चाहता है कि तेरे अंदर (भी) गुण पैदा हों, तो गुरमुखों को मिल के उनके साथ गुणों की सांझ करनी चाहिए। (गुरमुखों से) गुणों की सांझ करनी चाहिए, इस तरह (अंदर से) अवगुण त्याग के जीवन-यात्रा पर चला जा सकता है, सबसे प्रेम भरा बर्ताव करके भलाई के सुंदर उद्यम करके विकारों से मुकाबला और जीवन-युद्ध को जीता जा सकता है।
(गुरमुखों की संगति की बरकति से फिर) जहाँ भी जा के बैठें भलाई की बात ही की जा सकती है, और बुरी ओर से हट के आत्मिक जीवन देने वाला नाम-जल पीया जा सकता है।
(हे भाई!) अगर किसी को गुणों का डब्बा मिल जाए तो वह डब्बा खोल के (डब्बे की) सुगंधि लेनी चाहिए।
(जगत में अनेकों ही जीव गुण कमा रहे हैं, अनेकों ही अवगुण कमा रहे हैं। ये परमात्मा की अपनी ही रची हुई खेल है) परमात्मा स्वयं ही (ये सब कुछ) कर रहा है, उसके बिना और कोई नहीं कर सकता, (तभी तो) किसी और के पास (इसके संबंध में) कोई गिला-शिकवा आदि नहीं किया जा सकता। (फिर जो कुछ वह प्रभू करता है ठीक करता है) वह टूटा हुआ नहीं हैं, इस वास्ते (किसी कमी के बारे में) उसे कुछ कहने की आवश्यक्ता ही नहीं पड़ती। अगर वह टूटा हुआ (व भटका हुआ) हो तो जा के कुछ कहें भी, पर स्वयं करतार कोई भूल नहीं कर सकता। वह सब जीवों की अरदासें सुनता है वह सब जीवों के किए कर्मों को देखता है, माँगे बिना ही सबको दान देता है। हे नानक! वह सृजनहार ही सदा-स्थिर रहने वाला है। वह सब कुछ स्वयं ही करता है, कोई और (उससे आकी हो के) कुछ नहीं कर सकता। किसी और के पास जा के कोई गिला नहीं किया जा सकता।4।1।4।



