Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar – 7-5-25

सूही महला ५ ॥
हरि चरण कमल की टेक सतिगुरि दिती तुसि कै बलि राम जीउ ॥ हरि अम्रिति भरे भंडार सभु किछु है घरि तिस कै बलि राम जीउ ॥ बाबुलु मेरा वड समरथा करण कारण प्रभु हारा ॥ जिसु सिमरत दुखु कोई न लागै भउजलु पारि उतारा ॥ आदि जुगादि भगतन का राखा उसतति करि करि जीवा ॥ नानक नामु महा रसु मीठा अनदिनु मनि तनि पीवा ॥१॥ हरि आपे लए मिलाइ किउ वेछोड़ा थीवई बलि राम जीउ ॥ जिस नो तेरी टेक सो सदा सद जीवई बलि राम जीउ ॥ तेरी टेक तुझै ते पाई साचे सिरजणहारा ॥ जिस ते खाली कोई नाही ऐसा प्रभू हमारा ॥ संत जना मिलि मंगलु गाइआ दिनु रैनि आस तुम्हारी ॥ सफलु दरसु भेटिआ गुरु पूरा नानक सद बलिहारी ॥२॥ सम्हलिआ सचु थानु मानु महतु सचु पाइआ बलि राम जीउ ॥ सतिगुरु मिलिआ दइआलु गुण अबिनासी गाइआ बलि राम जीउ ॥ गुण गोविंद गाउ नित नित प्राण प्रीतम सुआमीआ ॥ सुभ दिवस आए गहि कंठि लाए मिले अंतरजामीआ ॥ सतु संतोखु वजहि वाजे अनहदा झुणकारे ॥ सुणि भै बिनासे सगल नानक प्रभ पुरख करणैहारे ॥३॥ उपजिआ ततु गिआनु साहुरै पेईऐ इकु हरि बलि राम जीउ ॥ ब्रहमै ब्रहमु मिलिआ कोइ न साकै भिंन करि बलि राम जीउ ॥ बिसमु पेखै बिसमु सुणीऐ बिसमादु नदरी आइआ ॥ जलि थलि महीअलि पूरन सुआमी घटि घटि रहिआ समाइआ ॥ जिस ते उपजिआ तिसु माहि समाइआ कीमति कहणु न जाए ॥ जिस के चलत न जाही लखणे नानक तिसहि धिआए ॥४॥२॥ {पन्ना 778}

अर्थ: हे भाई! मैं सुंदर प्रभू से सदके जाता हूँ (उसकी मेहर से) गुरू ने मेहरवान हो के मुझे उसके सुंदर चरणों का आसरा दिया है। मैं उस प्रभू से कुर्बान हूँ, उसके घर में हरेक पदार्थ मौजूद है, आत्मिक जीवन देने वाले नाम-जल से (उसके घर में) खजाने भरे पड़े हैं।

हे भाई! मेरा प्रभू-पति बड़ी ताकतों का मालिक है, वह प्रभू हरेक सबब बना सकने वाला है। (वह ऐसा है) जिसका नाम सिमरने से कोई दुख छू नहीं सकता, (उसका नाम) संसार-समुंद्र से पार लंघा देता है।

हे भाई! जगत के आरम्भ से ही (वह प्रभू अपने) भक्तों का रखवाला (चला आ रहा) है। उसकी सिफत सालाह कर कर के मैं आत्मिक जीवन हसिल कर रहा हूँ। हे नानक! (कह– हे भाई! उसका) नाम मीठा है, (सब रसों से) बड़ा रस है मैं तो हर वक्त (वह नाम-रस अपने) मन के द्वारा ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा पीता रहता हूँ।1।

अर्थ: हे भाई! मैं सुंदर प्रभू से सदके जाता हूँ, (जिस मनुष्य को) वह स्वयं ही (अपने चरणों से) जोड़ता है (उस मनुष्य का प्रभू से) फिर कभी वियोग नहीं होता।

हे राम! मैं तेरे से कुर्बान हूँ। जिस मनुष्य को तेरा सहारा मिल जाता है, वह सदा ही आत्मिक जीवन हासिल किए रखता है। पर, हे सदा कायम रहने वाले और सब को पैदा करने वाले! तेरा आसरा मिलता भी तेरे पास ही से है। तू ऐसा हमारा मालिक है, जिस (के दर) से कोई खाली (बेमुराद) नहीं जाता। हे प्रभू! तेरे संत जन मिल के (सदा तेरी) सिफत सालाह के गीत गाते हैं, (उनको) दिन-रात तेरी (सहायता की) ही आशा रहती है। हे नानक! (कह– हे प्रभू!) मैं तुझसे सदा सदके जाता हॅूँ (तेरी ही मेहर से वह) पूरा गुरू मिलता है जिसका दीदार हरेक मुराद पूरी करने वाला है।2।

अर्थ: हे भाई! मैं प्रभू जी से सदके जाता हूँ। (प्रभू की मेहर से जिसको) दया का श्रोत गुरू मिल गया, उसने अविनाशी प्रभू के गुण गाने आरम्भ कर दिए, उसने सदा-स्थिर प्रभू के दर पर कब्जा कर लिया, उसको सदा-स्थिर प्रभू मिल गया, (उसको प्रभू के दर से) सम्मान मिला, उपमा मिली।

हे भाई! जिंद के मालिक प्रीतम प्रभू के गुण सदा ही गाया करो, (जो मनुष्य गुण गाता है उसके वास्ते जिंदगी के) सुंदर दिन आए रहते हैं, उसको प्रभू जी अपने गले से लगाए रहते हैं, सबके दिल की जानने वाले प्रभू उससे मिल जाते हैं। (उस मनुष्य के अंदर) उच्च आचरण और संतोष (हर वक्त अपना पूरा प्रभाव डाले रखते हैं, मानो, सत्-संतोख के अंदर) बाजे बज रहे हैं, (सत्-संतोख की उसके अंदर) एक रस मीठी लय बनी रहती है।

हे नानक! सब कुछ करने की समर्था रखने वाले प्रभू अकाल पुरूख के गुण गा-गा के सारे डर नाश हो जाते हैं।3।


अर्थ: हे भाई! मैं प्रभू जी से सदके जाता हूँ। (जो मनुष्य उस प्रभू को सदा सिमरता है, उसके अंदर) असल आत्मिक जीवन की सूझ पैदा हो जाती है, (उसको) इस लोक में और परलोक में वही परमात्मा दिखाई देता है। उस जीव को परमात्मा (ऐसे) मिल जाता है कि कोई (भी परमात्मा से उसको) जुदा नहीं कर सकता। (वह मनुष्य हर जगह) उस आश्चर्य-रूप प्रभू को देखता है, (वही हर जगह बोलता हुआ उसे) सुनाई देता है, हर जगह वही उसे दिखता है। पानी में, धरती पर, आकाश में परमात्मा ही उसको व्यापक दिखता है।

हे नानक! (कह– हे भाई!) जिस परमात्मा के करिश्मे-तमाशे बयान नहीं किए जा सकते, (जो मनुष्य सदा) उसका ही ध्यान धरता है, उस मनुष्य की ऊँची हो चुकी आत्मिक अवस्था का मूल्य नहीं डाला जा सकता, (क्योंकि) जिस परमात्मा से वह पैदा हुआ है (सिमरन की बरकति से) उसमें (हर वक्त) लीन रहता है।4।2।

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