Amrit Vele Ka Hukamnama (HINDI) Gurdwara Sri Guru Singh Sabha C Block Hari Nagar – 13-2-25

जैतसरी महला ५ छंत घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ सलोक ॥
दरसन पिआसी दिनसु राति चितवउ अनदिनु नीत ॥ खोल्हि कपट गुरि मेलीआ नानक हरि संगि मीत ॥१॥ छंत ॥ सुणि यार हमारे सजण इक करउ बेनंतीआ ॥ तिसु मोहन लाल पिआरे हउ फिरउ खोजंतीआ ॥ तिसु दसि पिआरे सिरु धरी उतारे इक भोरी दरसनु दीजै ॥ नैन हमारे प्रिअ रंग रंगारे इकु तिलु भी ना धीरीजै ॥ प्रभ सिउ मनु लीना जिउ जल मीना चात्रिक जिवै तिसंतीआ ॥ जन नानक गुरु पूरा पाइआ सगली तिखा बुझंतीआ ॥१॥ {पन्ना 703}

अर्थ: मुझे मित्र प्रभू के दर्शनों की तांघ लगी हुई है, मैं दिन-रात हर वक्त सदा ही (उसके दर्शन ही) चितारती रहती हूँ। हे नानक! (कह–) गुरू ने (मेरे) माया के जाल को काट के मुझे मित्र हरी से मिला दिया है।1।

छंत। हे मेरे सत्संगी मित्र! हे मेरे सज्जन! मैं (तेरे आगे) एक आरजू करती हूँ! मैं उस मन को मोह लेने वाले प्यारे लाल को तलाशती फिरती हूँ। (हे मित्र!) मुझे उस प्यारे के बारे में बता, मैं (उसके आगे अपना) सर उतार के रख दूंगी (और कहूँगी – हे प्यारे!) पल भर के लिए हमें भी दर्शन दे (हे गुरू!) मेरी आँखें प्यारे के प्रेम रंग में रंगी गई हैं (उसके दर्शनों के बिना) मुझे रक्ती भर समय के लिए भी चैन नहीं आता। मेरा मन प्रभू के साथ मस्त है जैसे पानी की मछली (पानी में मस्त रहती है), वैसे ही पपीहें को (बरखा की बूँद की) प्यास लगी रहती है।

हे दास नानक! (कह– जिस भाग्यशाली को) पूरा गुरू मिल जाता है (उसके दर्शनों की) सारी प्यास बुझ जाती है।

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